23 Oct 2017, 17:21:33 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us facebook twitter android
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मातृत्व लाभ अधिनियम में बदलाव, कामकाजी माँओं के आए अच्छे दिन!

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  : मोदी सरकार द्वारा महिलाओं के हितों की रक्षा की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। पहले प्रधानमंत्री मोदी ने हरियाणा की जमीन से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं का नारा दिया ताकि देश की बेटियों को कोख में ही मार डालने की कुप्रवृत्ति से समाज को मुक्ति मिले। फिर उज्ज्वला योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों को रसोई गैस दिए जा रहे हैं, जिससे वहाँ महिलाओं को चूल्हे के धुंए से राहत मिल सके और उनका स्वास्थ्य न बिगड़े। वहीं अब प्रधानमंत्री मोदी की सरकार महिलाओं के लिए एक और नया तोहफा लेकर आई है। अमूमन  कामकाजी महिलओं के समक्ष यह परेशानी आती है कि बच्चा होने के दौरान उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ेगी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, मोदी सरकार ने मानसून सत्र में मातृत्व लाभ अधिनियम में संशोधन कर इस सम्बन्ध में वर्तमान समय की आवश्यकतानुसार उपयुक्त प्रावधान किए हैं। इस संशोधित विधेयक को संसद से भी मंजूरी मिल गई और अब यह क़ानून का रूप ले चुका है।

 

संसद में पारित हो चुके इस मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम के मुताबिक़ मां बनने पर बच्चे की देखभाल के लिए महिलाओं को पूरे वेतन के साथ पहले के 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह के अवकाश का प्रावधान किया गया है। सबसे खास बात यह है कि निजी व सरकारी संस्थानों में जहां भी 10 या इससे ज्यादा कर्मचारी काम करते है, वहाँ पर यह अधिनियम लागू होगा।

 

इसमें कामकाजी महिलाओं को मां बनने पर 26 सप्ताह की छुट्टी देने का प्रावधान किया गया है। पहले यह सीमा १२ सप्ताह थी। इस अधिनियम में संशोधन से उस मां को राहत मिलेगी, जो अपने बच्चे के लिए अपने करियर के सभी सपनों को कुर्बान करने कर देती है। अब महिलाओं को ऐसी कुर्बानी नहीं देनी पड़ेगी। हालाकि गौर करने वाली बात यह भी है कि कामकाजी महिलाओं को 26 सप्ताह का यह मातृत्व अवकाश सिर्फ शुरुआती दो बच्चों के लिए दिया जाएगा। तीसरा बच्चा होने पर उन्हें पूर्ववत ढंग से ही 12 सप्ताह की छुट्टी ही दी जाएगी। इस प्रावधान को जनसख्या नियंत्रण की सरकार की मंशा से भी जोड़कर देख सकते हैं।

 

संसद से पारित इस मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम के मुताबिक़ मां बनने पर बच्चे की देखभाल के लिए महिलाओं को पूरे वेतन के साथ अवकाश का प्रावधान किया गया है। सबसे खास बात यह है कि निजी व सरकारी संस्थानों पर जहां भी 10 या इससे ज्यादा कर्मचारी काम करते है, वहीं पर यह अधिनियम काम करेगा।

 

अब मोदी सरकार इस तरफ भी ध्यान दे रही है और इस दिशा में प्रयासरत है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को भी इस क़ानून का लाभ मिल सके।  अभी सरकार इस दिशा में बढ़ रही है और पूरी उम्मीद की जा सकती है कि इस दिशा में भी उसकी तरफ से कदम उठाए जाएंगे। बहरहाल, इतना तो स्पष्ट है कि मोदी सरकार महिलाओं के हितों के प्रति न केवल गंभीर है बल्कि इस दिशा में व्यावहारिकता के धरातल पर पूरी तरह से प्रयासरत भी है।

 

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