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हर लड़की किसी की बहन है, तो फिर.......

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नई दिल्ली। दीपक झा 

 
आज रक्षाबंधन का त्यौहार है। हम सभी बचपन से इसे मनाते आ रहे है। इसके बारे में पढते आ रहे है। खासकर पेपर के समय में तो जरुर ही रट्टे मारते थे कि रक्षाबंधन हिंदुओ का पवित्र त्योहार है यह सावन मास कि पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन भाई बहन सुबह सुबह नहा धोकर नये कपडे पहन कर तैयार होते हैआदि। करीब एक दो पेज तो हम सबने रटा ही होगा। लेकिन क्या हम इसका महत्व सच में समझते है। अगर हां तो क्यों हम अपनी बहन और पडोस में रहने वाली, सहपाठी, सहकर्मी में अंतर कर देते है। खैंर अंतर करना भी ठीक है लेकिन इतना बढा अंतर कहां तक ठीक है साहब। खुद तो छुट्टी के दिन घुमने के लिए आप अपनी साथी को बुलाते है और हरसंभव प्रयास करते है कि वह आये लेकिन घर में बहन बोले कि आज दोस्तों के साथ बाहर घुमने जाना है तो लग जाते है  सवालों की झडी लगाने। अपनी बहन की सुरक्षा की चिंता करना कि कही उसके साथ कुछ गलत न हो जाये? कैसे दोस्त होंगे?  जमाना बहुत खराब है। इस जमाने को खराब किसने किया है। जाहिर है आपने और मैने, जिसे हम कभी कभी असमाजिक तत्व भी कह देते है। राजनेता हमेशा भाईयो बहनो कर के संबोधित करते है लेकिन क्या सच में वह सबको वही दर्जा देता है जो अपनी बहन को देता है। अगर हां तो क्यों मां बहन कि गालियां इनके मुंह पर ही रहती है। क्यों कभी कभी यह किसी महिला के साथ अभद्र व्यवहार कर देते है जो शायद अपनी  बहन के बारे में गल्ती से भी कल्पना नहीं कर सकते। पुलिस जो हमारी रक्षा के लिए मुस्तैद रहती है आज के दिन कई संगठनों की महिलाएं उन्हें राखी बांधती है और नारियों की रक्षा का वचन लेती है तो क्यों बलात्कार, अपहरण जैसी घटनाओं के बाद भी कुछ पुलिस वाले एफआईआर करने से कतराते है। या अजिबो गरिब सवाल पूछ कर पीडिता को असहज करते है। हमने प्राचीन काल के अनुसार गुरुओ, ब्राह्मणो द्वारा रक्षा सूत्र बंधवाने का प्रसंग भी सुना है। तो आज ये ही कुछ तथाकथित बाबा क्यों अपनी बहन बेटियो की उम्र की लडकियों के साथ भोग विलास में लिप्त है। आखिर परेशानी कहा है? क्यो समाज में महिलाओ के साथ बलात्कार, अपहरण, शोषण आदि इतना बढ रहा है?  मेरी समझ में शायद हम अपने और पराये में अंतर कर देते है। अगर हम अपनी महिला साथियों के साथ ऐसा कुछ दुर्व्यवहार करें ही नहीं जिसे अपनी बहन के साथ होता न देख सकें। और जिस प्यार स्नेह कि अपेक्षा हम अपनी महिला साथीयों से करते है, वहीं हक अपनी बहन को भी उसके साथीयों के लिए दें तो समस्या कि जड ही खत्म क्योकि आपकी साथी भी किसी कि बहन है उसी तरह, जिस तरह आपकी  बहन किसी कि साथी है। एक समारोह में दामिनी की मां ने बहुतखूब कहा कि कभी किसी भी लडकी के साथ कुछ भी करने से पहले यह सोचना कि अगर यह तुम्हारी बहन के साथ होता तो तुम क्या करते। यकिनन यह ऐसी लाईन है जिसे अगर हम गांठ मार ले तो शायद बलात्कार, अपहरण, शोषण जैसी घटनाएं बिल्कुल बंद हो जाए। तो आइए आज रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन कि रक्षा के साथ साथ सभी महिलाओं की रक्षा करने व उनका सम्मन करने का वचन लें और लड़कियों को पढाये, लिखाये आगे बढायें तभी सही मायने में रक्षाबंधन पर्व का महत्व सार्थक होगा।
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