23 Oct 2017, 17:19:29 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us facebook twitter android
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मोदी-मोदी के जाप ने बिगाड़ा "आप" का खेल, दिल्ली वालों के सपने रह जाएंगे अधूरे???

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 नई दिल्ली। अनिल कुमार

सन 2011-2015 भारत की राजनीति और सामाजिक चेतना में जागृति के लिहाज से बहुत हीं महत्वपूर्ण रहा है। यह दौर भविष्य में एक कालखंड के रूप में याद किया जाएगा। इस दौर में राजनीतिक गलियारों में अकल्पनीय इतिहास लिखा गया तो सामाजिक सरोकार से ताल्लुख रखने वाले आमजन ने सत्ता के गलियारों में हलचल भी पैदा कर दिया। इस दौर ने उस पुराने दौर की यादों को ताजा कर दिया जब सत्ता परिवर्तन और समाजिक चेतना की जागृति के लिए जनआन्दोलन हुआ करते थे। सन 2013 और 2014 का वर्ष इतिहास के पन्नों में स्वर्णीम अक्षरों में लिखा जा चुका है। एक गांधीवादी विचारों वाले नेता ने अपने कुछ युवा सहयोगियों के साथ मिलकर सत्तातंत्र में फैले भ्रष्चार के खिलाफ जब आन्दोलन छेड़ा तो पूरा भारत एक स्वर में, एक ताल में बिना किसी स्वार्थ के उनके पिछे चल पड़ा और फिर एक नया इतिहास बना। कहते हैं जब-जब किसी के स्वाभिमान को ललकारा गया है तब-तब एक नया इतिहास बना है। और इस दौर ने भी किसी ने आम जन के स्वाभिमान को ललकारा तो फिर इतिहास तो बनना हीं था। भारत में एक नई पार्टी ने जन्म लिया। पार्टी के मुख्या बने अरविंद केजरीवाल और पार्टा का नाम भी रखा गया- आम आदमी पार्टी। अर्थात आम लोगों की पार्टी। पार्टी के मुख्या का मूल उद्देश्य था- हम गरीबों और आम लोगों के लिए कार्य करेंगे, हम आम लोग की तरह रहगें और आम लोगों की तरह ही अपनी राजनीतिक जीवन को अब के बाद से जीएंगे। आम आदमी पार्टी अन्य पार्टियों कि तरह न घर लेगा न गाड़ी, न बंगला लेगा न सैलरी। लेकिन उन्हें कहां पता था कि गांधी के इस देश में अब गांधीगिरी की राजनीति नहीं बल्कि एडवर्ड स्टेनली से लेकर विलियम हेयर तक चलने वाली राजनीति हीं भारतीय परंपरा के अनुसार चल रही है।
बहरहाल अपने आप को दूसरे पार्टियों से हमेशा अलग बताने वाले आम आदमी पार्टी और विवादों को रिश्ता शुरू से हीं  चोली-दामन का रहा है। आम आदमी पार्टी अपने किसी न किसी कारनामें के लिए हमेशा चर्चा में बनी रहती है। दिल्ली पुलिस की मांग हो या फिर अधिकारों की लड़ाई में एलजी नजीब जंग के साथ जंग। पहली दफा जब आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली में बनी तो लोगों में एक उम्मीद जगी कि ये तो आम लोगों की पार्टी है कुछ न कुछ अलग जरूर होगा। लेकिन कुछ हीं महीने बाद आमलोगों की सरकार गिर गई। अरविंद केजरीवाल ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसके हजारों कारण लोगों के बीच गिनाएं भी और अपील भी किया कि अगली बार पूर्ण बहुमत के साथ आप की सरकार बनाएं तो दिल्ली मैं बेहतर काम कर पाऊंगा। ठीक केजरीवाल के अपील के अनुसार लोगों ने आप को ऐतिहासिक जीत दिलाई। 70 सीटों वाली इस विधानसभा में आप सरकार को 67 सीटें दिल्ली वालों ने दिया और बाकी तीन सीटें गांधी जी के बंदर के रूप में भाजपा वालों को सौंपी। 
अब केजरीवाल को अपने वायदे के अनुरूप दिल्ली में विकास की गति को पंख देना था क्योंकि आप सरकार के पास पूर्ण बहुमत है लेकिन कुछ हीं दिनों में मामला ऐसा उलझने लगा कि आम आदमी के सपने सिर्फ सपने बन कर रह गए। भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करने वाले केजरीवाल के विधायकों पर एक-एक कर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप लगने लगे और पिछले साल फरवरी में 'आप' के दिल्ली की सत्ता में दूसरी बार आने के बाद से अब तक पार्टी के 12 विधायकों को अलग-अलग मामलों में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। इस मामले अब केजरीवाल और पूरी आप सरकार ने कहना शुरू कर दिया है कि जो भी हो रहा है सब प्रधानमंत्री मोदी के इशारे पर हो रहा है। किसी भी मामले में आप के कोई भी विधायक फंसे तो सीधा आरोप मोदी पर लगाना आप सरकार के नाकामी को बताता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमेशा डिग्री के मामले में घेरने वाले अरविंद केजरीवाल के विधायक स्वयं फर्जी डिग्री मामले में फंसते जा रहे हैं। हाल ही में हरियाणा पुलिस ने दिल्ली कैंट से 'आप' के विधायक सुरिंदर सिंह के खिलाफ पूर्व विधायक और बीजेपी नेता करण सिंह तंवर की शिकायत पर कार्रवाई करते धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। सुरिंदर पर स्नातक की फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी शिक्षक की नौकरी हासिल करने के आरोप लगने के बाद यह मामला दर्ज हुआ है। तंवर द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत हासिल किए गए सुरिंदर के सेवा रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों से पता चला कि 'आप' विधायक ने 12वीं पास की थी, जबकि झज्जर के एक सरकारी स्कूल में शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक (पीटीआई) के पद के लिए आवेदन करते वक्त उन्होंने खुद को स्नातक होने का दावा किया था।
वहीं दूसरी ओर संसद भवन का वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड करने के मामले में 'आप' सांसद भगवंत मान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। संसद की सुरक्षा से खिलवाड़ करने के मामले में जांच समिति ने भगवंत मान को 2 हफ्ते संसद न आने की सलाह देते हुए बड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दे रखी है। आपको अगर याद हो तो याद किजिए इससे पहले भी ओखला के विधायक अमानतुल्लाह खान को एक महिला को कार से कुचलने की कोशिश करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वहीं दूसरी ओर महरौली से विधायक नरेश यादव को पंजाब पुलिस द्वारा मलेरकोटला में हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।  थोड़ा ओर पीछे याद करें तो आप विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष दिनेश मोहनिया की एक महिला के साथ कथित छेड़छाड़ के आरोप में हुई गिरफ्तारी ने एक बार फिर से सबको सोचने पर मजबूर कर दिया कि 'आप' पार्टी में आखिर क्या हो रहा है। मोहनिया पर एक बुजुर्ग के साथ बदसलूकी का भी आरोप है। इससे पहले भी 'आप' के पूर्व कानून मंत्री रहे सोमनाथ भारती को 'खिड़की एक्सटेंशन' मामले में अफ्रीकन महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हीं की पत्नी ने उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था। जिसके बाद से पार्टी की काफी किरकिरी हुई थी। आप विधायकों के कारनामें की लिस्ट अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि दूसरी पारी में 'आप' पार्टी में कानून मंत्री का प्रभार संभालने वाले जीतेंद्र तोमर को भी फर्जी डिग्री के मामले में जेल की हवा खानी पड़ी। विधायकों के अलावा उनके प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर में भी सीबीआई का छापा मारा गया, उनको भी गिरफ्तार किया गया।
अब इन तमाम मामलों पर गोर करने के बाद एक आम जन यह सोचने को मजबूर है कि क्या सच में 'आप' पार्टी किसी राजनीति का शिकार हो रही है, या फिर उसके फर्जी विधायकों से पार्टी की सच्चाई सामने आ रही है। अरविंद केजरीवाल जब सत्ता में आए तो उनकी सबसे बड़ी ताकत थी ईमानदारी के साथ लोगों के बीच अपनी बात रखाना और इसी ईमानदारी के बलबुते पर दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने वाले केजरीवाल आखिर अपने विधायकों में ऐसा किया देख रहे हैं कि उन्हें पार्टी से निष्कासित करने के बजाए बचा रहे हैं। ऐसे विधायक जिन पर आरोप पर आरोप लगते जा रहे हैं उन्हें आम जनता की रखवाली के लिए आगे ला रहे हैं और तमाम मामलों के लिए सीधे-सीधे पीएम नरेंद्र मोदी को दोषी ठहरा रहे हैं। 
आम आदमी पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार दिल्ली में उसकी सरकार को काम नहीं करने देना चाहती, वह जानबूझ कर, गलत नीयत से उसके नेताओं को फंसाने की कोशिश कर रही है। अब एक आम नागरिक को क्या पता कि कौन किसे फंसा रहा है या फिर कौन किसको काम नहीं करने दे रहा है। ऐसे भी एक कहावत है कि बिना आग का धुआं नहीं होता। जब आप के विधायक किसी न किसी मामले में गिरफ्तार किए जा रहे हैं तो जाहिर है दाल में कुछ काला जरूर है। अन्यथा किसी भी नागरिक या नेता को पुलिस बेवजह क्यों गिरप्तार करेगी। क्या पुलिस जवाबदेह नहीं है? केजरीवाल को मोदी-मोदी का जाप करने के बजाए आम आदमी पार्टी में अनुशासन के मामले में बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है और अपनी स्वच्छ ईमानदार छवि को बरकरार रखने के लिए दोषी विधायकों को बचाने के बजाए उन्हें पार्टी से निष्कासित कर एक नई मिसाल कायम करनी चाहिए कि हम औरों से वाकई अलग हैं।
हालांकि यह भी सत्य है कि राजनीति को नई दिशा से देखने वाले केजरीवाल की अभी तक किसी भी मामले में कोई परिपक्वता नहीं दिखाई दी है और न ही जनप्रतिनिधियों को देखकर लगता है कि वह पद की गरिमा को भलि-भांति समझते हैं। पार्टी का अनुशासनहीन और गैर-जिम्मेदाराना रवैया कहीं न कहीं दिल्लीवासियों को निराश करता है, क्योंकि दिल्ली वालों ने उन्हें सत्ता की कमान राज्य की बेहतरी के लिए सौंपी थी और उनके पिछले कार्यकाल में हुई गलतियों को माफ कर फिर से एक मौका दिया है कि वह अपने कामों से यहां की जनता का दिल जीत सकें। लेकिन शायद सत्ता के इस माया नगरी में केजरीवाल ऐसे फंसे हैं कि उन्हें अब यह नहीं सूझ रहा है कि आम जनता के लिए भला क्या है और कैसे राजनीति की जाए, कैसे आम जन की इच्छाओं को नेक नीयत के साथ पूरा किया जाए। इसमें कोई शक नहीं कि केजरीवाल वाकई एक बेहतर इंसान हैं लेकिन राजनीति के इस भंवर में फंसने के बाद ईमानदारी रूपी डंडे से शासन नहीं होता बल्कि राजनीति के गलियारों में येन-केन-प्रकारेण और साम-दाम-दंड-भेद की जादुई छड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मांगने वाले केजरीवाल को यह समझना होगा कि फिलहाल दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है जहां पर हर फैसला लेने के लिए वे स्वतत्र नहीं है और संविधान के दायरे में मिले अधिकारों के तहत हीं वह अपने अधिकार का प्रयोग करें तो दिल्लीवालों का भला अपने-आप हो जाएगा। मोदी-मोदी का जाप करने से आप का हीं खेल बिगड़ेगा और दिल्ली वालों के सपने जिन्हें आप हकीकत में बदलना चाहते थे वह सब अधूरे रह जाएंगे। इसलिए हर बात पर केंद्र को दोषी ठहराना और अपने विधायकों या पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए कार्य को हीं सही मानना आपकी प्रतिष्ठा और ईमानदारी के दामन पर दाग लगाता है। दिल्ली वालों की भलाई एवं बेहतरी के लिए यह जरूरी है कि केंद्र के साथ मिलकर साम्जस्य बिठाएं और अपने विधायकों की हर गलती के लिए पीए मोदी पर निशाना साधने के बजाए या एलजी पर आरोप मढ़ने के बजाए विवेक से काम लेते हुए उन विधायकों या कार्यकर्ताओं पर सख्ती अपनाइये जो आपकी स्वच्छ छवि के आड़ में गलत कारनामें को अंजाम दे रहा है और पार्टी के साथ आपकी छवि को कराब कर रहा है। (यह विचार मेरे अपने हैं यदि किसी भी व्यक्ति विशेष या समूह को कोई भावनात्मक ठेस पहुंचे तो उसके लिए मैं क्षमा याचक हूं।)
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