23 Oct 2017, 17:18:31 के समाचार About us Android App Advertisement Contact us facebook twitter android
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2008 की आर्थिक वैश्विक मंदी के बाद भारत में जीडीपी ग्रोथ 63.8%, वेतन बढ़ी महज 0.2%, मेक्सिको 10.6 फीसदी के साथ सबसे आगे

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 नई दिल्ली।  करीब 8 साल पहले वैश्विक मंदी के बाद से भारत में जीडीपी में तो अच्छी बढ़ोतरी हुई लेकिन सैलरी में बढ़ोतरी देखे तो वेतनवृद्धि मात्र 0.2 फीसदी रही है, वहीं समीक्षाधीन अवधि में चीन ने सबसे अधिक 10.6 फीसदी की वेतनवृद्धि दर्ज की है. हे ग्रुप के विभाग कॉर्न फेरी के ताजा विश्लेषण के अनुसार इस अवधि में वास्तविक आधार पर भारत में वेतनवृद्धि मात्र 0.2 फीसद रही है जबकि इस दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 63.8 फीसदी की बढ़त हुई है. समीक्षाधीन अवधि में वास्तविक वेतनवृद्धि में चीन, इंडोनेशिया और मेक्सिको सबसे आगे रहे हैं. इन वेतनवृद्धि क्रमश: 10.6 फीसदी, 9.3 फीसदी और 8.9 फीसदी रही है.

वहीं कुछ अन्य उभरते बाजारों मसलन तुर्की, अर्जेंटीना, रूस और ब्राजील की स्थिति इस मामले में काफी खराब रही है. इन देशों की वास्तविक वेतनवृद्धि क्रमश: नकारात्मक 34.4 फीसदी, नकारात्मक 18.6 फीसदी, नकारात्मक 17.1 फीसदी और नकारात्मक 15.3 फीसदी रही है. वहीं दुनियाभर के देशों के मुकाबले कनाडा की सैलरी रिकवरी विकसित देशों में सबसे बेहतर है. यह 7.2 फीसदी की सैलरी ग्रोथ दिखा रहा है, जबकि इसकी जीडीपी 11.2 फीसदी की रही है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में सैलरी ग्रोथ में काफी असमानता दर्ज की गई है. सीनियर लेवल पर तो 30 फीसदी ज्यादा तक सैलरी ग्रोथ हुई है, जबकि निचले लेवल पर सैलरी ग्रोथ में 30 फीसदी गिरावट आई है. कोर्न फेरी हे ग्रुप के मुताबिक जिन देशों की समीक्षा की गई है उनमें भारत में सैलरी ग्रोथ सबसे असमान रही है. निचले स्‍तर पर कर्मचारियों की सैलरी में बहुत कम इजाफा हुआ है जबकि उच्च स्तर पर लोगों की सैलरी ग्रोथ बेहतर रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर उभरते जी-20 बाजार या तो एक तरफ या दूसरी तरफ रहे हैं. यानी या तो वहां सबसे अधिक वेतनवृद्धि हुई या सबसे कम. हालांकि, भारत इनके बीच खड़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वेतनवृद्धि सबसे अधिक असमान रही है.
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